एक जुनूनी बच्चे के सपने की सच्ची कहानी

एक जुनूनी बच्चे के सपने की सच्ची कहानी |

हेलो दोस्तों नमस्कार मैं अभिषेक गुप्ता आप लोगों के लिए एक ऐसी कहानी लाया हूं जिसमें एक छोटे से बच्चे ने अपने सपने को ठाना और वह 21 वर्ष की उम्र में उस कार्य को सिद्ध करके दिखाया |
तो चलिए उस कहानी की शुरुआत करते हैं |


एक बार की बात है किसी शहर में एक लड़का रहता था जिसका नाम सुमित था 
स्कूल से आने के बाद वह अपने पिताजी के साथ काम पर जाया करता था उसके पिताजी एक घोड़े के अस्तबल में नौकर के रूप में काम करते थे वह लड़का रोज ही देखता और सोचता था कि किस तरह उसके पिता इतनी मेहनत करते हैं लेकिन फिर भी उन्हें वह सम्मान कभी नहीं मिलता जो उस अस्तबल के मालिक को मिलता था वह रोज देखता था कि किस तरह उस अस्तबल का मालिक समाज में खूब इज्जत पाता है 

एक दिन जब वह स्कूल गया तो उसके शिक्षक ने सभी लड़को से एक लेख लिखकर लाने को कहा उस लेख में सभी बच्चे को यह लिखकर लाना था कि वह बड़े होकर क्या  बनना चाहते हैं और उनका क्या सपना है अब अब सुमित ने रात भर मेहनत करके एक बहुत ही बेहतरीन लेख लिखा जिसमें उसने दर्शाया कि वह बड़ा होकर एक अस्तबल का मालिक बनेगा जहां बहुत सारे घोड़े प्रशिक्षण लेंगे और आगे अपने सपने को पूरे विस्तार से बताते हुए उसने 100 एकड़ के अपने सपनों वाले रेंज की फोटो भी बना दी
Horse field 


 अगले दिन उसने पूरे मन से अपना लेख शिक्षक को दे दिया शिक्षक ने सभी कापियां जांचने के बाद परिणाम फल को घोषित किया और सुमित को लेख के लिए कोई भी नंबर नहीं दिए और उसकी कॉपी में बड़े अक्षरों से फेल लिख दिया अब  सुमित सर के पास गया और पूछा आपने मुझे मार्क्स नहीं दिया और फिर क्यों कर दिया टीचर ने कहा अगर तुम भी बाकी बच्चों की तरह छोटा-मोटा लेख लिख लाते तो तुम पास हो जाते लेकिन तुमने जो लिखा है वह पूरी तरह से असंभव है तुम लोगों के पास कुछ नहीं है इसलिए जो तुमने लिखा है ऐसा संभव ही नहीं हो सकता है
 तुम चाहो तो मैं तुम्हें एक और मौका देता हूं तुम कल दूसरा लेख लिखकर लाना जिसमें कोई वास्तविक लक्ष्य बना लेना अब घर जाकर सुमित बहुत सोचा लेकिन उसे कुछ करने और बनने का विचार नहीं नहीं आ पाया अगले दिन वह टीचर के पास गया और कहा आपको जो भी मांस देना हो आप दे दीजिए लेकिन मेरा तो यही फैसला है और यही मेरा सपना है और मुझे कुछ और नहीं बनना है और ना ही कुछ करना है मैं आज से यह प्रण लेता हूं कि मैं दिन और रात मेहनत करके इस मुकाम को हासिल करूंगा |
 मैं किसी भी कीमत पर अपने सपने को बदल नहीं सकता लगभग 21 साल बाद सुमित ने सचमुच अपना सपना पूरा कर लिया !

इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है कि अगर हम कुछ करने की ठान ले और बिना विचलित हुए पूरे मन से उस लक्ष्य को पाने के लिए अपनी सारी ज्ञान लगा दे तो हमें अपना सपना साकार करने से कोई भी नहीं रोक सकता सिर्फ आपके मन में खुद के सपनों के प्रति कोई शंका नहीं होनी चाहिए


तो दोस्तो यह कहानी आप लोगों को कैसी लगी इसको आप लोग कमेंट करके जरूर बताएं और जैसा कि इस बच्चे ने कर दिखाया वो  कहते हैं ना" मन के हारे हार मन के जीते जीत" यही सबसे बड़ा सूत्र है अपने जीवन में कुछ करने का


written by Abhishek gupta

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